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खरगोन के मोमिनपुरा में बच्चों का भविष्य अंधेरे में, बहुजन समाज पार्टी ने उठाई आवाज

आज हम एक ऐसे मुद्दे पर बात करेंगे, जो समाज की नींव को हिला रहा है। मध्य प्रदेश के खरगोन ज़िले से एक दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है, जहाँ बच्चों का भविष्य अंधेरे में है, और इसकी वजह जानकर आप हैरान रह जाएँगे।

खरगोन के मोमिनपुरा इलाके में आदिवासी समुदाय के बच्चों के लिए स्कूल के दरवाज़े बंद हैं। इन बच्चों के पास न तो जन्म प्रमाण पत्र है और न ही आधार कार्ड। ज़रूरी दस्तावेजों की इस कमी के कारण, ये बच्चे शिक्षा के अधिकार से वंचित हो रहे हैं।

यह सिर्फ़ काग़ज़ की कमी नहीं है, बल्कि यह एक ऐसी खाई है जो इन बच्चों को समाज की मुख्यधारा से दूर कर रही है। उनका भविष्य अधर में लटक रहा है और परिवारों में निराशा का माहौल है।

लेकिन अब एक उम्मीद की किरण दिखाई दे रही है। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने इस गंभीर मुद्दे को उठाया है। बसपा के ज़िला प्रभारी नरेंद्र कंचोले ने अपनी टीम के साथ मोमिनपुरा का दौरा किया, प्रभावित परिवारों से मिले, और उन्हें भरोसा दिलाया कि वे इस लड़ाई में उनके साथ हैं।

नरेंद्र कंचोले ने साफ़ कहा है कि वे जल्द ही ज़िला कलेक्टर से मिलेंगे और इस समस्या का समाधान सुनिश्चित करेंगे। लेकिन सवाल यह है कि आखिर इतनी बड़ी संख्या में बच्चे इन बुनियादी दस्तावेज़ों से वंचित क्यों हैं? क्या प्रशासन ने अब तक इस पर ध्यान क्यों नहीं दिया?

आदिवासी बच्चों का भविष्य अंधेरे मेंबसपा ने उठाऐ सवाल यह मामला सरकारी व्यवस्था पर एक बड़ा सवाल खड़ा करता है। एक तरफ़ सरकार “सबको शिक्षा” की बात करती है, वहीं दूसरी तरफ़, इन बच्चों को कागज़ के एक टुकड़े के बिना शिक्षा से वंचित किया जा रहा है।

अब देखना यह होगा कि बसपा की पहल के बाद ज़िला प्रशासन कितनी गंभीरता से इस समस्या पर कदम उठाता है। क्या इन बच्चों को उनका हक मिल पाएगा?
क्या मोमिनपुरा के बच्चों का भविष्य उज्ज्वल हो पाएगा? इन सभी सवालों के जवाब का हमें इंतज़ार रहेगा।

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